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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में जरूरी है पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤², जानिठकà¥à¤¯à¤¾ हैं इसके फायदे
मां बनना जिंदगी का सबसे सà¥à¤–द अहसास है। जिस पल गरà¥à¤ में à¤à¥à¤°à¥‚ण आता है, उस पल से à¤à¤• नई जिंदगी शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है। इसलिठगरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में बहà¥à¤¤ जरूरी है कि महिलाओं का पूरा-पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाà¤à¥¤ मां और उसके पेट...
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में जरूरी है पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤², जानिठकà¥à¤¯à¤¾ हैं इसके फायदे
मां बनना जिंदगी का सबसे सà¥à¤–द अहसास है। जिस पल गरà¥à¤ में à¤à¥à¤°à¥‚ण आता है, उस पल से à¤à¤• नई जिंदगी शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है। इसलिठगरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में बहà¥à¤¤ जरूरी है कि महिलाओं का पूरा-पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाà¤à¥¤ मां और उसके पेट में पल रहे बचà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ देखà¤à¤¾à¤², उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जरूरी परामरà¥à¤¶ देना और साधन उपलबà¥à¤§ कराना, पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤² है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जटिलताओं को पता लगाना और उनका हल निकालना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान पेट में पल रहे शिशॠको पà¥à¤°à¤¸à¤µ के पहले पोषण और विटामिन की जरूरत है। मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• या रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ में जनà¥à¤® दोष को रोकने के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ के विटामिनà¥à¤¸ की रोजाना खà¥à¤°à¤¾à¤• लेनी होती है। फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ à¤à¤¸à¤¾ ही à¤à¤• विटामिन है।
गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ मां को महसूस होने वाली असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ पर नजर रखने और उसे दूर करने के लिठचेकअप जरूरी है। इसमें खà¥à¤¦ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ किया जाता है कि किस तरह सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ बनाठरखे, ताकि बचà¥à¤šà¥‡ के विकास में बाधा न आà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² केयर में सबसे पहले शरीर के महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ संकेतों पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देते हैं। जांचते हैं कि शरीर का तापमान कà¥à¤¯à¤¾ है, बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° सामानà¥à¤¯ है या नहीं। ये जांच सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में कम से कम à¤à¤• बार जरूर होनी चाहिà¤à¥¤ इनके अलावा सिरदरà¥à¤¦, बà¥à¤–ार, बहà¥à¤¤ कमजोरी महसूस होना, सांस लेने में कठिनाई, पेशाब करने में दरà¥à¤¦, पेट में अधिक दरà¥à¤¦ होना या हमेशा दरà¥à¤¦ होना जैसी चीजों के बारे में धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया जाता है।
à¤à¤• रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, जिन महिलाओं की पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤² नहीं होती है, उनके बचà¥à¤šà¥‡ सामानà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में 3 गà¥à¤¨à¤¾ कम वजन के साथ जनà¥à¤® लेते हैं। à¤à¤¸à¥€ महिलाओं का मृतà¥à¤¯à¥ का जोखिम à¤à¥€ 5 गà¥à¤¨à¤¾ बढ़ जाता है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि अगर महिला 18 से 35 साल के बीच की उमà¥à¤° की है तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चौथे से 13वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बीच डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जरूर ले जाना चाहिà¤à¥¤ 14वें से 28वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक हर महीने में à¤à¤• बार जाना चाहिà¤à¥¤ 29वें से 35वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक हर महीने में दो बार जाना होगा। 36वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से हर सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में à¤à¤• बार डॉकà¥à¤Ÿà¤° को जरूर दिखाना चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² केयर के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से पहली बार मिलने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ से आहार और जीवनशैली के बारे में बात कर सकते हैं। फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के बारे में जानकारी ले सकते हैं, जिसका सेवन बहà¥à¤¤ जरूरी है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° महिला के अब तक हà¥à¤ इलाज और पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ बीमारियों की जानकारी ले सकते हैं। अगर कोई दवा या सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ ले रहे हों तो उसके बारे में पता करेंगे। डà¥à¤¯à¥‚ डेट का आकलन कर सकते हैं। इन सबके आधार पर कà¥à¤› टेसà¥à¤Ÿ करवाने की सलाह दे सकते हैं।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ चरण है और इस समय à¤à¥à¤°à¥‚ण तेजी से विकसित होता है और वह बहà¥à¤¤ नाजà¥à¤• à¤à¥€ होता है। इसलिठगरà¥à¤ में पल रहे à¤à¥à¤°à¥‚ण की वृदà¥à¤§à¤¿ व विकास के लिठदेखà¤à¤¾à¤² बहà¥à¤¤ जरूरी है।
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